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जमीन अच्छी हो खाद अच्छा हो परन्तु पानी खारा हो तो फूल खिलते नही, भाव अच्छे हो कर्म भी अच्छे हो मगर वाणी खराब हो तो संबंध कभी टिकते नही !
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"अच्छे लोग" बहुत ही सस्ते होते हैं। बस मीठा बोलो और खरीद लों ! शायद इसीलिए लोग उनकी "कीमत" नहीं समझते।
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जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हर रोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा, पर ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में क्या मिला रहे है।
जो मुझे आता है वो मैं कर लूँगा, जो मुझे नहीं आता वो मैं सीख लूँगा, जीवन में सफलता का यही मूल मंत्र है।