by Newspositive
क्रोध हमारा एक ऐसा हुनर है, जिसमें फंसते भी हम हैं, उलझते भी हम हैं, पछताते भी हम हैं, और पिछड़ते भी हम ही...
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“वाणी” और “पानी” दोनों में ही “छवि” नज़र आती है “पानी” स्वच्छ हो तो “चित्र” नज़र आता है “वाणी” मधुर हो तो “चरित्र” नज़र आता...
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“सवेरा तो रोज ही होता है परन्तु शुभप्रभात क्या होता है?” “जीवन में जिस दिन आप अपने अंदर की बुराईयो को समाप्त कर उच्च विचार तथा अपनी आत्मा को शुद्ध कर दिन की शुरुआत करते हो वही दिन शुभप्रभात होता...
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शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते...
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“ज्ञानी होने से शब्द समझ में आने लगते हैं और अनुभवी होने से अर्थ”