शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं।

शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं।

शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते...
शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं।

क्या खुब कहा है किसी ने, बीतता वक़्त है, लेकिन। ख़र्च हम हो जाते हैं। कैसे “नादान”है हम दुःख आता है। तो,”अटक” जाते है! औऱ सुख आता है तो “भटक” जाते हैं।

 क्या खुब कहा है किसी ने, बीतता वक़्त है, लेकिन। ख़र्च हम हो जाते हैं। कैसे “नादान”है हम दुःख आता है। तो,”अटक” जाते है! औऱ सुख आता है तो “भटक” जाते...
शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं।

पूरी दुनिया की सबसे’ ‘खूबसूरत’ जोड़ी कोन सी है? ‘मुस्कुराहट और आंसू’ इन दोनों का एक साथ मिलना मुश्किल है लेकिन जब ये दोनों मिलते है वो पल सबसे खूबसूरत होता है।

पूरी दुनिया की सबसे’ ‘खूबसूरत’ जोड़ी कोन सी है? ‘मुस्कुराहट और आंसू’ इन दोनों का एक साथ मिलना मुश्किल है लेकिन जब ये दोनों मिलते है वो पल सबसे खूबसूरत होता...
शिक्षा” हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं।

सही “मौके” पर “खड़े” होकर बोलना एक “साहस” है उसी प्रकार “खामोशी” से बैठकर दूसरों को “सुनना” भी एक “साहस” है।

सही “मौके” पर “खड़े” होकर बोलना एक “साहस” है उसी प्रकार “खामोशी” से बैठकर दूसरों को “सुनना” भी एक “साहस”...