” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा”...
” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

ढूंढने पर आपको वो ही मिलेंगे जो खो गए थे, वो इंसान कभी नही मिलेंगे जो बदल गए है। तो फिर साझेदारी करो तो किसी के दर्द की करो। क्योंकि खुशियों के तो दावेदार बहुत हैं।

ढूंढने पर आपको वो ही मिलेंगे जो खो गए थे, वो इंसान कभी नही मिलेंगे जो बदल गए है। तो फिर साझेदारी करो तो किसी के दर्द की करो। क्योंकि खुशियों के तो दावेदार बहुत...
” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब हैं जीवन का आनंद मिलजुल कर रहने में है खुश रहो खुशिया बाँटते रहो।

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब हैं जीवन का आनंद मिलजुल कर रहने में है खुश रहो खुशिया बाँटते...
” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

जीवन उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जो इसका आनंद ले रहे हैं। उन लोगों के लिए मुश्किल है, जो इसका विश्लेषण कर रहे हैं।

जीवन उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जो इसका आनंद ले रहे हैं। उन लोगों के लिए मुश्किल है, जो इसका विश्लेषण कर रहे...
” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

समस्याओं का अपना कोई साईज नही होता। वो तो सिर्फ हमारी हल करने की क्षमता के आधार पर छोटी और बडी़ होती है।

समस्याओं का अपना कोई साईज नही होता। वो तो सिर्फ हमारी हल करने की क्षमता के आधार पर छोटी और बडी़ होती...