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क्रोध हमारा एक ऐसा हुनर है, जिसमें फंसते भी हम हैं, उलझते भी हम हैं, पछताते भी हम हैं, और पिछड़ते भी हम ही हैं।
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“समय" के फैसले कभी गलत नहीं होते, बस साबित होने में समय लगता है, “स्वयं" को स्वयं ही खुश रखें, ये जिम्मेदारी किसी और को ना दें।
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जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।
अगर आप में दूसरों को खुशी देने की ताक़त है, तो खुशियां बांटने में देर मत लगाओ। दुनिया को इसकी बहुत ज़रूरत है।