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समय का कैसा दौर है, रात- दिन की दौड़ है खुश रहने का समय नहीं, बस खुश दिखने की होड़ हैl
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इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता है,यह जानते हुए भी कि भाग्य से ऊंचा उसका कर्म है, जो उसके स्वयं के हाथों में है!
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ऐ ज़िंदगी मुश्किलों के सदा हल दे, थक न सके हम, फुर्सत के कुछ पल दे, दुआ यही है दिल से कि सबका हो सुखद आज, और उस से भी बेहतर कल दे।