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यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी "रक्तदान" है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह "श्रम दान" है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह "अन्न दान" है।
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यदि आप में दूसरों के लिए "प्रार्थना" और "सेवा" करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए "प्रार्थना" करने की आवश्यकता नहीं होगी।
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जो मुझे आता है वो मैं कर लूँगा, जो मुझे नहीं आता वो मैं सीख लूँगा, जीवन में सफलता का यही मूल मंत्र है।
ऐ ज़िंदगी मुश्किलों के सदा हल दे, थक न सके हम, फुर्सत के कुछ पल दे, दुआ यही है दिल से कि सबका हो सुखद आज, और उस से भी बेहतर कल दे।