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कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है I यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए I आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए तब तक कमाओ जब तक "महंगी" चीज "सस्ती" ना लगने लगे चाहे वो सामान हो या सम्मान।
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ये दोस्ती का "बंधन "भी बडा अजीब है, मिल जाए तो बातें लंबी, "बिछड" जाए तो यादें लंबी।
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जरुरत से ज्यादा मिले उसको कहते हैं नसीब भगवान का दिया सब कुछ हैं फिर भी रोता है उसको कहते हैं बदनसीब और जिंदगी में कम पाकर भी हमेशा खुश रहता है उसको कहते हैं खुशनसीब
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।