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दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।
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ज्ञान की बारिश जहाँ भी हो रही हो भीगते रहिए। हर शख्स कुछ न कुछ सिखाता है बस सीखते रहिए।
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जो मुझे आता है वो मैं कर लूँगा, जो मुझे नहीं आता वो मैं सीख लूँगा, जीवन में सफलता का यही मूल मंत्र है।
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।