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अजीब चलन है दुनिया का दीवारों में आये दरार तो, दीवारे गिर जाती है। पर रिश्तों में आये दरार तो दीवारे खड़ी हो जाती है।
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दिन की शुरूआत में लगता है की ज़िंदगी में पैसा बहुत ज़रूरी है लेकिन दिन ढलने पर समझ आता है कि ज़िंदगी में .शांति अधिक ज़रूरी है।
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चाबी से खुला ताला बार बार काम मे आता है, लेकिन हथौड़े से खुलने पर दुबारा काम का नही रहता। इसी तरह संबन्धों के ताले को क्रोध के हथौड़े से नहीं बल्कि प्रेम की चाबी से खोलें।
क्रोध हमारा एक ऐसा हुनर है, जिसमें फंसते भी हम हैं, उलझते भी हम हैं, पछताते भी हम हैं, और पिछड़ते भी हम ही हैं।