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यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी "रक्तदान" है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह "श्रम दान" है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह "अन्न दान" है।
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दोष कांटो पर भी कैसे डाले भाई साब, पैर हमने ही रखा था वो तो अपनी जगह सही थे।
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"खामोश" चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती "आँखों" में भी ,"जख्म" गहरे होते है, जिनसे अक्सर "रूठ" जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा "गहरे" होते है।
जैसे जैसे आपका नाम ऊंचा होता है, वैसे वैसे शांत रहना सीखिए क्योंकि। आवाज हमेशा सिक्के ही करते है, नोटों को कभी बजते नहीं देखा।