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एक व्यक्ति ने भगवान से पूछा, तुझे कैसे रिझाऊं मैं। कोई वस्तु नहीं ऐसी जिसे तुझ पर चढाऊं मैं, "भगवान ने उत्तर दिया" संसार की हर वस्तु तुझे मैनें ही दी है। तेरे पास अपना सिर्फ तेरा "अहंकार" है,जो मैनें नहीं दिया। उसी को तु मुझे "अर्पण" कर दे,"तेरा जीवन सफल हो जाएगा"
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योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है l
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सही "मौके" पर "खड़े" होकर बोलना एक "साहस" है उसी प्रकार "खामोशी" से बैठकर दूसरों को "सुनना" भी एक "साहस" है।
“दुनिया की लगभग हर चीज सिर्फ ठोकर लगने से ही टूट जाती है, सिर्फ एक कामयाबी ही है, जो ठोकर खाने के बाद ही मिलती है।”