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महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन (Mahaveer Intercontinental Service Organization), नई दिल्ली एवं रायपुर के तत्वावधान में इंदौर चैप्टर द्वारा आयोजित पांच दिवसीय दृष्टिबाधित दिव्यांग स्किल डेवलेपमेंट प्रशिक्षण शिविर (25 से 29 जुलाई 2025) ने नया इतिहास रच दिया।...
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एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, वडोदरा, गुजरात (Vadodara, Gujarat) के 13 वर्ष 07 माह 25 दिन के प्रतिभावान बालक न्याय बलर (Nyaay Balar) ने ब्लाइंडफोल्डेड 10 मीटर एयर पिस्टल मेन्स शूटिंग मैच (Blindfolded 10M Air Pistol Men’s Shooting Match) में सबसे अधिक स्कोर कर गोल्डन बुक...
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17 अगस्त 2025 को भोपाल शहर ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। ऋचा फिटनेस क्लब (Richa Fitness Club) ने लायंस क्लब भोपाल सरोवर के सहयोग से गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Golden Book of World Records) में नाम दर्ज करवाते हुए ग्रुप में सबसे लंबे समय तक डांस...
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अद्भुत स्मरण शक्ति, मेधा और आध्यात्मिक साधना का परिचय देते हुए आचार्य नयचंद्र सागर सूरिश्वर जी महाराज के शिष्य, विजयचंद्र सागर जी (Vijaychandra Sahar ji), ने विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने मात्र 13 वर्ष 02 दिन की आयु में लगातार 100 श्रुत प्रश्नों के क्रमबद्ध...
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भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव को भक्ति और भव्यता के साथ मनाते हुए, इस्कॉन रायपुर (ISKCON) ने एक अद्भुत विश्व रिकॉर्ड बनाया जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यहाँ 10,000 किलो सामक चावल (सांवा/बरनयार्ड मिलेट) की खिचड़ी तैयार की गई, जिसने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह...
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इंदौर क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ADCP) श्री राजेश डंडोतिया जी (Mr. Rajesh Dandotia) ने नशामुक्ति के क्षेत्र में एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित करते हुए 19 जुलाई 2025 को एलन करियर इंस्टीट्यूट, इंदौर में आयोजित ड्रग अवेयरनेस सेशन के माध्यम से Golden Book of...
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भरतनाट्यम, भारत का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है। जिसकी उत्पत्ति तमिलनाडु में हुई थी। यह नृत्य भाव, राग और ताल के तत्वों को मिलाकर बनाया गया है। इसे भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर आधारित माना जाता है। भरतनाट्यम एक कठिन शास्त्रीय नृत्य है, जिसे सीखने में सालो की मेहनत लगती...
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आज भी हमारे देश में कई गाँव – शहर ऐसे है जो आधुनिक सोच को बढ़ावा नहीं देते हैं, जहां लड़कियों को पढ़ने या बाहर जाने से मना किया जाता है। आज की कहानी उन्हीं में से एक गाँव के एक महिला की है, जिन्होने परिवार एवं समाज के कठिनाईयों को पार करते हुए आज विश्व पटल पर...
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अगर किसी कार्य को लगन और कड़ी मेहनत के साथ किया जाये तो उस कार्य को करने के लिए बढ़ती उम्र भी नहीं रोक सकती हैं, इस पंक्ति को सही साबित करते हुए श्रीमती कांता देवी हुड्डा जी (Kanta Devi Hudda) ने 56 वर्ष की आयु में लोहे के सरिये को गले से मोड़ने का कारनामा कर दिखाया।...