दुनिया के बेमिसाल नेल आर्टिस्ट : वाजिद अली खान
लोहे की कीलों का क्या उपयोग होता है ? जवाब आसान है कीलों को दीवार पर लगाया जाता है। परन्तु कीलों को भी क्या कलात्मक रूप में प्रयोग करके असाधारण कलाकृति बनाई जा सकती है तो इसका “हां” में उत्तर देते है मध्यप्रदेश में जन्मे 40 वर्षीय जनाब मोहम्मद वाजिद अली...हमारी उपलब्धियों में दूसरों का भी योगदान होता है क्योंकि समन्दर में भले ही पानी अपार है पर सच तो यही है कि वो नदियों का उधार होता है।
हमारी उपलब्धियों में दूसरों का भी योगदान होता है क्योंकि समन्दर में भले ही पानी अपार है पर सच तो यही है कि वो नदियों का उधार होता है।
ज्ञान से शब्द समझ में आते हैं, और अनुभव से अर्थ इंसान भी बहुत कमाल करता है, किसी को पसंद करें तो बुराई नहीं देखता, और जिससे से नफ़रत करे तो उसकी अच्छाई नहीं देखता।
ज्ञान से शब्द समझ में आते हैं, और अनुभव से अर्थ इंसान भी बहुत कमाल करता है, किसी को पसंद करें तो बुराई नहीं देखता, और जिससे से नफ़रत करे तो उसकी अच्छाई नहीं देखता।
समय का कैसा दौर है, रात- दिन की दौड़ है खुश रहने का समय नहीं, बस खुश दिखने की होड़ हैl
समय का कैसा दौर है, रात- दिन की दौड़ है खुश रहने का समय नहीं, बस खुश दिखने की होड़ हैl
गलत व गलती मे बहुत छोटा फर्क होता है! गलत सदा गलत नीयत से ही संभव होता है जबकि, गलती सदा भूल वश होती है! इसलिये गलतियाँ तो कीजिए, पर गलत किसी के साथ मत कीजिये !
गलत व गलती मे बहुत छोटा फर्क होता है! गलत सदा गलत नीयत से ही संभव होता है जबकि, गलती सदा भूल वश होती है! इसलिये गलतियाँ तो कीजिए, पर गलत किसी के साथ मत कीजिये !
पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता जो कर्म को समझता है उसे धर्म को समझने की जरूरत ही नहीं संपत्ति के उत्तराधिकारी कोई भी या एक से ज्यादा हो सकते है लेकिन कर्मों के उत्तराधिकारी केवल हम स्वयं ही होते है l
पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता जो कर्म को समझता है उसे धर्म को समझने की जरूरत ही नहीं संपत्ति के उत्तराधिकारी कोई भी या एक से ज्यादा हो सकते है लेकिन कर्मों के उत्तराधिकारी केवल हम स्वयं ही होते है l
शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।