हस्ताक्षर में जीवन का प्रतिबिंब देखने वाले कर्म योगी : श्री दीपक राठौर जी

हस्ताक्षर में जीवन का प्रतिबिंब देखने वाले कर्म योगी : श्री दीपक राठौर जी

किसी भी मनुष्य द्वारा हस्ताक्षर करते समय उसका चित्त एवं मनोवृति तथा प्रकृति के बीच एक अलौकिक नाता हो जाता है, भले ही वह अत्यल्प समय के लिए ही होता है, इसीलिए व्यक्ति द्वारा जो हस्ताक्षर किया जाता है उसमें उसके समस्त मनोभाव अंतरित हो जाते हैं। यह बात अलग है कि...
हेयर डोनेट कराने वाले विशिष्ट व्यक्तित्व : अशोक पालीवाल

हेयर डोनेट कराने वाले विशिष्ट व्यक्तित्व : अशोक पालीवाल

सैलून और हेयर ड्रेसर से अलबत्ता सभी व्यक्तियों का पाला पड़ता है, चाहे स्त्री हो या पुरुष लेकिन इससे जुड़े कार्य करने वालों को प्राचीन काल से ही सेवक का दर्जा दिया जाता था। कमोवेश अभी भी इस नजरिए में अधिक बदलाव नहीं दिखाई देता है। कोई सैलून चलाने वाला या कोई हेयर...
आज का अभिमन्यु: मृगेंद्र राज

आज का अभिमन्यु: मृगेंद्र राज

अभी दो वर्ष भी ठीक से उम्र नहीं हुई कि विविध विषयों के कठिन से कठिन प्रश्नों का पलक झपकते जवाब हाजिर। थोड़ी और आयु हुई तो सार्वजनिक मंचों पर इस अद्भुत प्रतिभा को देख सभी दंग, तीन वर्ष की अल्पायु से ही देश के मूर्धन्य कवियों, शायरों के साथ मंच साझा करते हुए अपनी कविता...
पक्षियों के अनोखे चित्रकार : प्रोफेसर अरुण खेर

पक्षियों के अनोखे चित्रकार : प्रोफेसर अरुण खेर

वनस्पति एवं पक्षियों का नाता तो चोली-दामन का होता है, इंदौर, मध्य प्रदेश के निवासी प्रोफेसर अरुण खेर (Arun Kher) ने अपनी कलात्मक साधना से इस रिश्ते को और भी गहरा करने का प्रयास किया है। आज विकास की तेज आंधी का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव जैव विविधता पर पड़ रहा है, पक्षियों...
गणितीय तारामंडल का नया सितारा : किसलय शर्मा

गणितीय तारामंडल का नया सितारा : किसलय शर्मा

क्रिकेट खेलने वाले शख्श जो राज्य स्तर का जाना-माना नाम हों, वह जब गणित की ओर अपना मुख मोंडे एवं सफलता के ऐसे परचम फहराए कि वैश्विक उपलब्धि हाँसिल हो तो आश्चर्य लगना स्वाभाविक है क्योंकि क्रिकेट यानी खेल एवं गणित यानी गंभीर अध्ययन एक साथ कोई व्यक्ति नहीं कर पाता है। या...
कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l

कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l

कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l

कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l

कागज के टुकड़े करना सरल है, कपड़े के टुकड़े करना थोड़ा कठिन है, लोहे के टुकड़े करना काफी कठिन है, लेकिन सबसे ज्यादा कठिन कुछ है तो वह है हमारे अंदर स्थित अहम के टुकड़े करना।

कागज के टुकड़े करना सरल है, कपड़े के टुकड़े करना थोड़ा कठिन है, लोहे के टुकड़े करना काफी कठिन है, लेकिन सबसे ज्यादा कठिन कुछ है तो वह है हमारे अंदर स्थित अहम के टुकड़े करना।

कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l

जिंदगी का सच हम भी वही है,संबंध भी वही हैं,रास्ते भी वही है। बदलते हैं,तो सिर्फ ‘समय,संजोग और नजर।

जिंदगी का सच हम भी वही है,संबंध भी वही हैं,रास्ते भी वही है। बदलते हैं,तो सिर्फ ‘समय,संजोग और नजर।

कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l

जिस प्रकार “पानी” के बगैर, “नदी” का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार “मधुरता” के बगैर, “संबंधों” का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।

जिस प्रकार “पानी” के बगैर, “नदी” का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार “मधुरता” के बगैर, “संबंधों” का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।

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