हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

हमे जो मिला है, हमारे भाग्य से ज्यादा मिला है यदि आपकी पाँव में जूते नहीं हैं तो अफसोस मत कीजिये दुनियां में तो कई लोगों के पास पाँव ही नहीं है।  

हमे जो मिला है, हमारे भाग्य से ज्यादा मिला है यदि आपकी पाँव में जूते नहीं हैं तो अफसोस मत कीजिये दुनियां में तो कई लोगों के पास पाँव ही नहीं है।  

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

जो समय “चिंता” में व्यतीत होता है वह “कूड़ेदान” में जाता है और जो समय “चिंतन” में व्यतीत होता है वह “तिजोरी” में जमा होता है।

जो समय “चिंता” में व्यतीत होता है वह “कूड़ेदान” में जाता है और जो समय “चिंतन” में व्यतीत होता है वह “तिजोरी” में जमा होता है।

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

धनवान बनने के लिए एक-एक कण का संग्रह करना पडता है औऱ गुणवान बनने के लिए एक-एक क्षण का सदुपयोग करना पडता है कोशिश धनवान और गुणवान दोनों बनने की करें क्योंकि दोंनो का जीवन मे बहुत महत्व है। 

धनवान बनने के लिए एक-एक कण का संग्रह करना पडता है औऱ गुणवान बनने के लिए एक-एक क्षण का सदुपयोग करना पडता है कोशिश धनवान और गुणवान दोनों बनने की करें क्योंकि दोंनो का जीवन मे बहुत महत्व है। 

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

रंग रूप देखकर किसी की फितरत का अंदाजा मत लगाना क्योंकि वफ़ादार और अच्छे लोग अक्सर सादगी में ही मिलते हैं।

रंग रूप देखकर किसी की फितरत का अंदाजा मत लगाना क्योंकि वफ़ादार और अच्छे लोग अक्सर सादगी में ही मिलते हैं।

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

पानी का असली स्वाद तब पता लगता है जब हम बहुत प्यासे होते हैं! ठीक उसी तरह प्रेम और सहयोग का पता तब चलता है जब हम बहुत कठिनाई में होते हैं।

पानी का असली स्वाद तब पता लगता है जब हम बहुत प्यासे होते हैं! ठीक उसी तरह प्रेम और सहयोग का पता तब चलता है जब हम बहुत कठिनाई में होते हैं।

हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।

दूसरों को समझना बुद्धिमानी है, खुद को समझना असली ज्ञान है। दूसरों को काबू करना बल है, और खुद को काबू करना वास्तविक शक्ति है! जिसने संसार को बदलने की कोशिश की वो हार गया और जिसने खुद को बदल लिया वो जीत गया।

दूसरों को समझना बुद्धिमानी है, खुद को समझना असली ज्ञान है। दूसरों को काबू करना बल है, और खुद को काबू करना वास्तविक शक्ति है! जिसने संसार को बदलने की कोशिश की वो हार गया और जिसने खुद को बदल लिया वो जीत गया।

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