“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत...
“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

चलते रहे कदम तो। किनारा जरुर मिलेगा।। अन्धकार से लड़ते रहे। सवेरा जरुर खिलेगा। जब ठान लिया मंजिल पर जाना। तो रास्ता जरुर मिलेगा। ऐ राही ना थक, चलता चल। एक दिन समय जरुर फिरेगा।

चलते रहे कदम तो। किनारा जरुर मिलेगा। अन्धकार से लड़ते रहे। सवेरा जरुर खिलेगा। जब ठान लिया मंजिल पर जाना। तो रास्ता जरुर मिलेगा। ऐ राही ना थक, चलता चल। एक दिन समय जरुर...
“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

“अच्छे व्यक्ति” के साथ “संबंध” उस “गन्ने” के समान है जिसे आप तोड़ो या मरोड़ो या काटो या फिर कुचल दो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा कभी किसी को छोटा न समझिए हजारों के कपड़े शोरूम में लटकते रह गए और छोटा सा “मास्क” करोड़ों का व्यापार कर गया।

“अच्छे व्यक्ति” के साथ “संबंध” उस “गन्ने” के समान है जिसे आप तोड़ो या मरोड़ो या काटो या फिर कुचल दो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा कभी किसी को छोटा न समझिए हजारों के कपड़े शोरूम में लटकते रह गए और छोटा सा “मास्क” करोड़ों का...
“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है I यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए I आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए तब तक कमाओ। जब तक “महंगी” चीज “सस्ती” ना लगने लगे, चाहे वो सामान हो या सम्मान।

कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है I यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए I आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए तब तक कमाओ। जब तक “महंगी” चीज “सस्ती” ना लगने लगे, चाहे वो सामान हो या...
“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

चाबी से खुला ताला बार बार काम मे आता है, लेकिन हथौड़े से खुलने पर दुबारा काम का नही रहता। इसी तरह संबन्धों के ताले को क्रोध के हथौड़े से नहीं बल्कि प्रेम की चाबी से खोलें।

चाबी से खुला ताला बार बार काम मे आता है, लेकिन हथौड़े से खुलने पर दुबारा काम का नही रहता। इसी तरह संबन्धों के ताले को क्रोध के हथौड़े से नहीं बल्कि प्रेम की चाबी से...
“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

स्वभाव सूर्य जैसा होना चाहिए, न उगने का अभिमान और न डूबने का गम जीने का यही अंदाज रखो । जो तुम्हे ना समझे, उसे नजरअंदाज रखो। देने के लिए कुछ न होतो सामने वाले को सम्मान दे, यह भी बड़ा दान होगा।

स्वभाव सूर्य जैसा होना चाहिए, न उगने का अभिमान और न डूबने का गम जीने का यही अंदाज रखो । जो तुम्हे ना समझे, उसे नजरअंदाज रखो। देने के लिए कुछ न होतो सामने वाले को सम्मान दे, यह भी बड़ा दान...
“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती...
Share This