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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
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"दुनिया की लगभग हर चीज सिर्फ ठोकर लगने से ही टूट जाती है, सिर्फ एक कामयाबी ही है, जो ठोकर खाने के बाद ही मिलती है।”
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"अच्छे व्यक्ति" के साथ "संबंध" उस "गन्ने" के समान है जिसे आप तोड़ो या मरोड़ो या काटो या फिर कुचल दो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा कभी किसी को छोटा न समझिए हजारों के कपड़े शोरूम में लटकते रह गए और छोटा सा "मास्क" करोड़ों का व्यापार कर गया।
“समय” के फैसले कभी गलत नहीं होते, बस साबित होने में समय लगता है, “स्वयं” को स्वयं ही खुश रखें, ये जिम्मेदारी किसी और को ना दें।