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"गुस्सा" माचिस कि एक काड़ी के तरह है जो दूसरों से पहले खुद को जलाता है। "जो सबसे पहले क्षमा मांगता है वह सबसे बहादुर है, जो सबसे पहले क्षमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है और जो सबसे पहले भूल जाता है वह सबसे सुखी।"
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जमीन अच्छी हो खाद अच्छा हो परन्तु पानी खारा हो तो फूल खिलते नही, भाव अच्छे हो कर्म भी अच्छे हो मगर वाणी खराब हो तो संबंध कभी टिकते नही !
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क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।
“समय” के फैसले कभी गलत नहीं होते, बस साबित होने में समय लगता है, “स्वयं” को स्वयं ही खुश रखें, ये जिम्मेदारी किसी और को ना दें।