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कहते है कि एक गलतफहमी अच्छे से अच्छे रिश्ते को तोड़ देती है। विचारणीय बात यह है कि वह रिश्ता अच्छा कैसे हुआ, जो सिर्फ एक गलतफहमी से ही टूट जाए।
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दिन की शुरूआत में लगता है की ज़िंदगी में पैसा बहुत ज़रूरी है लेकिन दिन ढलने पर समझ आता है कि ज़िंदगी में .शांति अधिक ज़रूरी है।
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क्रोध हमारा एक ऐसा हुनर है, जिसमें फंसते भी हम हैं, उलझते भी हम हैं, पछताते भी हम हैं, और पिछड़ते भी हम ही हैं।
गलती करना सफलता का पहला कदम नहीं है बल्कि की गई गलती को सुधारना सफलता का पहला कदम है।