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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
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फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl
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"अच्छे लोग" बहुत ही सस्ते होते हैं। बस मीठा बोलो और खरीद लों ! शायद इसीलिए लोग उनकी "कीमत" नहीं समझते।
एक निऱाशावादी इंसान हर मौके पर सिर्फ कठिनाइयों को ही देखता है, जबकि एक आशावादी इंसान हर कठिनाई में मौके देखता है।