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ज्ञान से शब्द समझ में आते हैं, और अनुभव से अर्थ इंसान भी बहुत कमाल करता है, किसी को पसंद करें तो बुराई नहीं देखता, और जिससे से नफ़रत करे तो उसकी अच्छाई नहीं देखता।
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"बहस" और "बातचीत" में एक बड़ा फर्क है "बहस" सिर्फ़ यह सिद्ध करती है, *कि "कौन सही है" । जबकि "बातचीत" यह तय करती है,कि "क्या सही है"।
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जो समय "चिंता" में व्यतीत होता है वह "कूड़ेदान" में जाता है और जो समय "चिंतन" में व्यतीत होता है वह "तिजोरी" में जमा होता है।
“अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं हैं, जितना की सीखने की इच्छा ना रखना।”