आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।

दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।

आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले  आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है। 

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।