नमक जैसा बनाइये अपना “व्यक्तित्व” आपकी उपस्थिति का भले ही पता न चले पर अनुपस्थिति का अहसास अवश्य होना चाहिये।
नमक जैसा बनाइये अपना “व्यक्तित्व” आपकी उपस्थिति का भले ही पता न चले पर अनुपस्थिति का अहसास अवश्य होना चाहिये।
नमक जैसा बनाइये अपना “व्यक्तित्व” आपकी उपस्थिति का भले ही पता न चले पर अनुपस्थिति का अहसास अवश्य होना चाहिये।
“भाग्य बारिश का पानी है और परिश्रम कुंए का जल।” बारिश में नहाना आसान तो है लेकिन रोज नहाने के लिए हम बारिश के सहारे नहीं रह सकते। इसी प्रकार भाग्य से कभी-कभी चीजे आसानी से मिल जाती है किन्तु हमेशा भाग्य के भरोसे नहीं जी सकते।
वही रहिए जो आप हैं, और वो कहिए जो आप महसूस करते हैं क्योंकि जो बुरा मानते हैं मायने नहीं रखते, और जो मायने रखते हैं वो बुरा नहीं मानते।
“दुनिया” के बड़े से बड़े साइंटिस्ट ये ढूँढ रहे है कि “मंगल ग्रह” पर “जीवन” है या नहीं पर “इंसान” ये नहीं ढूँढ रहा है कि “उसके जीवन में मंगल है या नहीं”
“अच्छाई-बुराई” “इंसान” के “कर्मो” में होती है। कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है, तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है।