by Newspositive
विश्वास तो दर्पण है- तोडो तो पहले जैसा रूप नहीं, जोड़ो तो पहले जैसा अक्स नहीं।
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बात इतनी मीठी रखो की कभी वापिस लेनी पड़ जाए तो ख़ुद को कड़वी ना लगे।
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उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।
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जिंदगी को खुलकर जीने के लिए एक छोटा सा उसूल बनाए रोज कुछ अच्छा याद रखें और कुछ बुरा भूल जाए।
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रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना...