by Mrigendra Raj Pandey
जन्मोपरांत शिशु इस धरती पर सबसे असहाय परन्तु साथ ही सबसे अधिक संस्कार और शिक्षा ग्रहण करने वाला प्राणी होता है। पैदा होते ही उसको किसी भी अवस्था में व्यवहार करना नहीं आता लेकिन धीरे-धीरे वह विविध गतिविधियों को सीखना प्रारंभ करता है एवं आगे बढ़ता जाता है। वैदिक कालीन...
by Mrigendra Raj Pandey
भक्तों द्वारा अपने भगवान या ईष्ट को प्रसन्न करने के लिए तथा अपनी समस्याओं के निवारण के लिए सरल भाषा में की गई प्रार्थना चालीसा कही जाती है। हनुमान चालीसा को चालीसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें 40 छंद होते हैं। महावीर हनुमान जी को भगवान शिव जी का ग्यारहवां रुद्र...
by Mrigendra Raj Pandey
सांस्कृतिक मान या मूल्य के रूप में आतिथ्य एक स्थापित समाजशास्त्रीय परिस्थिति है। आतिथ्य, अतिथि तथा मेजबान के बीच का संबंध होता है। यह सत्कारशीलता का व्यवहार है अतिथियों का उदारतापूर्वक स्वागत करना, उनका मनोरंजन करना, उन्हें शिष्टता पूर्ण सेवाएं प्रदान करना इसमें...
by Mrigendra Raj Pandey
भारतीय संस्कृति में मानव जीवन जिस धुरी पर टिका है उसके तीन आधार हैं- ज्ञान, धर्म और शांति। ज्ञान, धर्म तथा शांति की स्वामिनी के रूप में स्त्री वाचक शब्द का प्रयोग किया जाना अपने आप में ही स्त्री की श्रेष्ठता को साबित करता है। स्त्री को समृद्धि और संस्कृति की...
by Mrigendra Raj Pandey
भारतीय सांस्कृतिक विरासत इतनी संपन्न रही है कि इसे कभी विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त था। एक तरफ धरती पर नाना प्रकार की विसंगतियां विकराल मुंह बाए खड़ी हैं तो दूसरी तरफ सामर्थ्यवानों द्वारा स्वहित की ही कुंडली में मुंह छिपाए रहने से संकट के बादल कम छट पाते हैं। वैश्विक...