लेखनी में जिनके समाया है दर्द का समंदर: डॉक्टर कुसुम मानसी द्विवेदी

लेखनी में जिनके समाया है दर्द का समंदर: डॉक्टर कुसुम मानसी द्विवेदी

“मेरा-मेरा ही होता था बाकी सब हिस्सा बंटता था” जिनके जीवन में माता-पिता का प्यार इस कदर समाया था तो भला उन्हें इस बात का कैसे भान होता कि आगे चलकर परमपिता परमेश्वर उनके डगर को काफी कंकरीली-पथरीली करने जा रहे हैं। अयोध्या जनपद के मिल्कीपुर तहसील के अंतर्गत...
काव्य जगत की गोल्डन गर्ल: साक्षी रावल

काव्य जगत की गोल्डन गर्ल: साक्षी रावल

कविता लेखन मात्र शब्दों को कागज पर उकेरना भर नहीं होता है और न किसी विषय पर कुछ लिखना भर अथवा विचार विमर्श करना होता है। बल्कि समाज के अंतर्मन में चल रहे द्वंद उनकी पीड़ा-हर्ष, विविध भाव तथा निजता की परिधि में सूनी पड़ी गुफाओं में प्रविष्ट कर वहां दम घुट रहे जीवन को...
व्यंग्य के वैज्ञानिक: श्री पंकज प्रसून जी

व्यंग्य के वैज्ञानिक: श्री पंकज प्रसून जी

वैज्ञानिक अनुसंधान में जुड़े हुए इस मनीषी द्वारा इतनी खूबसूरती के साथ चुटीली कविताओं का सृजन किया जाता है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या एक वैज्ञानिक भी इतना अद्भुत सुन्दर साहित्य लिख सकता है जो लोगों के दिलों को तारों को झंकृत कर दे? ऐसे नायाब गुणों के...
साहित्य एवं संगीत के अनोखे संगम की स्वामिनी: मालविका हरि ओम

साहित्य एवं संगीत के अनोखे संगम की स्वामिनी: मालविका हरि ओम

साहित्य एवम् संगीत (litrature & music) दोनों ही लोगों के दिलों को छूने में कारगर होती है। आमजन की पीड़ा को अपनी लेखनी के माध्यम से उतारकर काव्य के रूप में सुनाना हो या प्रकृति के विविध स्वरूपों का वर्णन। लेखन की जादूगरनी की तरह लोगों के दिलों को छू कर श्रोताओं के...
किन्नर साहित्य का पितामह: डॉ महेंद्र भीष्म

किन्नर साहित्य का पितामह: डॉ महेंद्र भीष्म

भारतीय समाज में किन्नरों (transgender) की उपस्थिती प्राचीनकाल से ही रही है। विविध पौराणिक ग्रंथों में इनका उल्लेख मिलता है। रामायण काल और महाभारत काल में तो इनका प्रमुखता से वर्णन है। हर वर्ग द्वारा दुर्भाग्य से समाज के एक घटक के रूप में इनको प्रायः नजर अंदाज किया...
उर्दू में गीता का रचनाकार: अनवर जलालपुरी

उर्दू में गीता का रचनाकार: अनवर जलालपुरी

सनातन धर्मावलंबियों की आस्था के आधार के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी से श्रीमद्भागवत गीता का स्थान रहा है। इस पर अनेकानेक विद्वानों, मनीषियों, संत जनों, साहित्यकारों द्वारा विविध प्रकार से लिखा जाता रहा है और जनसामान्य को इसके द्वारा दिखाए गए मूल्यों को आत्मसात करने हेतु...