by Mrigendra Raj Pandey
“मेरा-मेरा ही होता था बाकी सब हिस्सा बंटता था” जिनके जीवन में माता-पिता का प्यार इस कदर समाया था तो भला उन्हें इस बात का कैसे भान होता कि आगे चलकर परमपिता परमेश्वर उनके डगर को काफी कंकरीली-पथरीली करने जा रहे हैं। अयोध्या जनपद के मिल्कीपुर तहसील के अंतर्गत...
by Mrigendra Raj Pandey
कविता लेखन मात्र शब्दों को कागज पर उकेरना भर नहीं होता है और न किसी विषय पर कुछ लिखना भर अथवा विचार विमर्श करना होता है। बल्कि समाज के अंतर्मन में चल रहे द्वंद उनकी पीड़ा-हर्ष, विविध भाव तथा निजता की परिधि में सूनी पड़ी गुफाओं में प्रविष्ट कर वहां दम घुट रहे जीवन को...
by Mrigendra Raj Pandey
वैज्ञानिक अनुसंधान में जुड़े हुए इस मनीषी द्वारा इतनी खूबसूरती के साथ चुटीली कविताओं का सृजन किया जाता है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या एक वैज्ञानिक भी इतना अद्भुत सुन्दर साहित्य लिख सकता है जो लोगों के दिलों को तारों को झंकृत कर दे? ऐसे नायाब गुणों के...
by Mrigendra Raj Pandey
साहित्य एवम् संगीत (litrature & music) दोनों ही लोगों के दिलों को छूने में कारगर होती है। आमजन की पीड़ा को अपनी लेखनी के माध्यम से उतारकर काव्य के रूप में सुनाना हो या प्रकृति के विविध स्वरूपों का वर्णन। लेखन की जादूगरनी की तरह लोगों के दिलों को छू कर श्रोताओं के...
by Mrigendra Raj Pandey
भारतीय समाज में किन्नरों (transgender) की उपस्थिती प्राचीनकाल से ही रही है। विविध पौराणिक ग्रंथों में इनका उल्लेख मिलता है। रामायण काल और महाभारत काल में तो इनका प्रमुखता से वर्णन है। हर वर्ग द्वारा दुर्भाग्य से समाज के एक घटक के रूप में इनको प्रायः नजर अंदाज किया...
by Mrigendra Raj Pandey
सनातन धर्मावलंबियों की आस्था के आधार के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी से श्रीमद्भागवत गीता का स्थान रहा है। इस पर अनेकानेक विद्वानों, मनीषियों, संत जनों, साहित्यकारों द्वारा विविध प्रकार से लिखा जाता रहा है और जनसामान्य को इसके द्वारा दिखाए गए मूल्यों को आत्मसात करने हेतु...