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शब्दों में धार नही, बल्कि आधार होना चाहिए। क्योंकि जिन शब्दों में धार होती है वो मन को काटते है। और जिन शब्दों में आधार होता है वो मन को जीत लेते है।
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आप जिंदगी बिताने नहीं आए, जीवन जीने के लिए आए हैं। नफरत करके किसी की अहमियत बढ़ाने से ज्यादा अच्छा है उसे माफ कर दो। हर कोई चंदन तो नही कि जीवन सुगन्धित कर सके, कुछ नीम के पेड़ भी होते हैं जो सुगन्धित तो नही करते पर काम बहुत आते है।
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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।