उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।

रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना है।

रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना...
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।

“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।

“कल्पनाएं” लिखना जितना आसान होता है, “भावनाएं” लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत...
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।

चलते रहे कदम तो। किनारा जरुर मिलेगा।। अन्धकार से लड़ते रहे। सवेरा जरुर खिलेगा। जब ठान लिया मंजिल पर जाना। तो रास्ता जरुर मिलेगा। ऐ राही ना थक, चलता चल। एक दिन समय जरुर फिरेगा।

चलते रहे कदम तो। किनारा जरुर मिलेगा। अन्धकार से लड़ते रहे। सवेरा जरुर खिलेगा। जब ठान लिया मंजिल पर जाना। तो रास्ता जरुर मिलेगा। ऐ राही ना थक, चलता चल। एक दिन समय जरुर...
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।

“अच्छे व्यक्ति” के साथ “संबंध” उस “गन्ने” के समान है जिसे आप तोड़ो या मरोड़ो या काटो या फिर कुचल दो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा कभी किसी को छोटा न समझिए हजारों के कपड़े शोरूम में लटकते रह गए और छोटा सा “मास्क” करोड़ों का व्यापार कर गया।

“अच्छे व्यक्ति” के साथ “संबंध” उस “गन्ने” के समान है जिसे आप तोड़ो या मरोड़ो या काटो या फिर कुचल दो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा कभी किसी को छोटा न समझिए हजारों के कपड़े शोरूम में लटकते रह गए और छोटा सा “मास्क” करोड़ों का...
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।

कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है I यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए I आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए तब तक कमाओ। जब तक “महंगी” चीज “सस्ती” ना लगने लगे, चाहे वो सामान हो या सम्मान।

कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है I यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए I आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए तब तक कमाओ। जब तक “महंगी” चीज “सस्ती” ना लगने लगे, चाहे वो सामान हो या...
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